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होस्टिंगर पर वर्डप्रेस वेबसाइट कैसे बनाएं Hostinger par WordPress Website kaise banaye

How To Create A WordPress Website in Hindi. होस्टिंगर पर वर्डप्रेस वेबसाइट कैसे बनाएं

वर्डप्रेस वेबसाइट को ऐसे होस्टिंगर को की होस्टिंग पर कैसे इंस्टाल करते है ये आज हम इस पेज पर जानने वाले हैं। लेखन उससे पहले बता दें की होस्टिंगर की होस्टिंग को आप कैसे और कौनसे प्लान का चुनाव करना चाहिए ये सभी होस्टिंग होस्टिंगर रिव्यू (Hostinger Review) वाले पोस्ट में बताया हुआ है।

तो दोस्तों अब हम आपको बिना किसी समय बरवाबाद किए WordPress को install कैसे करते है एवं WordPress पर वेबसाइट कैसे बनाते है।

Hostinger WordPress Website kaise banaye, होस्टिंगर पर वर्डप्रेस वेबसाइट कैसे बनाएं Hostinger par WordPress Website kaise banaye

अपने बेवसाइट बनाने हेतु आपको सबसे पहले एक डोमेन और एक अच्छा होस्टिंग प्लान चुनना चाहिए। और इसको कनेक्ट करना भी पढ़ता है। जब आप Domain को होस्टिंग से जोड़ने या कनेक्ट कर लेने के बाद वर्डप्रेस को इनस्टॉल करने के लिए चयन विशेष है।

WordPress Install Kaise Kare

WordPress Installation की प्रोसेस Hosting के अनुभव पर अनुसरण करती है, क्योंकि हर कंपनी के होस्टिंग डैशबोर्ड को अलग अलग रूप में तैयार किया जाता है।  इसलिए हर होस्टिंग की में WordPress Installation प्रोसेस भिन्न हो सकती है।

यह हमारी टीम द्वारा Hostinger की होस्टिंग पर WordPress install करने के कुछ चरण नीचे दिए है।क्योंकि हमारी ये वेबसाइट भी इसी तरह इसी पर होस्ट की गई है। इसलिए हम इसी पर WordPress बनाना सीखते हैं।

Step 1

आप जब होस्टिंग की किसी भी होस्टिंग प्लान को चयन करके परचेज कर लेते है तो उसके बाद आपको Hostinger के मुख्य पेज पर लॉगिन कर लेना है। जैसे ही आप होम पेज पर रहते है तो आपको आपको परचेज की गई होस्टिंग नजर आएंगे इस पर आपको Manage के ऑप्शन पर क्लिक करना है।

Hostinger Home page login and manage option

Step 2

आप जैसे ही Manage ऑप्शन को खोलने नया पेज आयेगा उसमे आपको डोमेन का नाम दिखाई देगा। Domain Name select करें और आप उस डोमेन को चूने जो आप यह चुनना चाहते हैं।

Step 3

डोमेन सिलेक्ट करने पर कुछ स्क्रॉल करे आपको एक ऑप्शन Auto Installer दिखेगा इसको चुने। और आगे बढ़ने के लिए दवाएं।

Hostinger manage auto installer website

यह से आप WordPress Installation को शुरू कर पायेंगे । Auto Installer में आने के बाद आपके सामने कई सारे ऑप्शन आने वाले है  उनमें से WordPress को सिलेक्ट करे या चुने।

Hostinger auto installer website wordpress click

Step 4

उसके बार आपके सामने एक अन्य ऑप्शन या विंडो ओपन होंगी उसमे आपको लॉगिंग के लिए Website की जानकारी आने याददस्त अनुसार डाले जैसे user name और password.

Hostinger install WordPress Website username and password setup

Install WordPress

  1. आप जब ऑप्शन को चुन रहे हो उस टाइम Domain वाले बॉक्स में http:// में बदलाब न करे।
  2. एवं आपके डोमेन मान में भी बदलाव नही करना हैं।
  3. WordPress के सेक्शन में कुछ भी नही भरना है।
  4. Owerwrite Existing Files पर टिक लगा दे। ताकि कोई अलग से फाइल होगी तो वह हट जाएगी।
  5. Administrator Username पर आपको username वो डाले जिसे आप याद रख पाए।
  6. Administrator Password पर आपको username वो डाले जिसे आप याद रख पाए। एवं वह कठिन हो ताकि किसी अन्य को मिल न पाए।
  7. Administrator Email में आपको Gmail id लिखे ताकि आपको संबंधित अपडेट एवं पासवर्ड बगेरा भूलने पर दोबारा पाने हेतु जीमेल से पा सकें।
  8. Website Title बॉक्स में अपनी वेबसाइट जिस पर है उसको लिखे यह बाद में चेंज भी कर सकते है।
  9. Version और लैंग्वेज को कुछ भी बदलाब न करें।
  10. इसके बाद install के आप्शन पर टेप कर दीजिये।
  11. जैसे ही आप सभी install की प्रक्रिया के लिए कुछ देर रखे लेकिन आप इस समय कुछ भी हटाना भी हैं। रूखे रहें।

Step 5

जब Install प्रक्रिया कुछ समय से कंप्लीट ही जाते तक आपको Domain name, Auto Installer वाले सेक्शन एमएस आपका अपनी वेबसाइट खुल जायेगी।

इस पेज से आप वर्डप्रेस पर जाकर डैशबोर्ड तक पहुंच कर आगे की प्रक्रिया में wordpress का login पेज आ जायेगा। यह आप यूजर नेम और पासवर्ड से अंदर प्रवेश कर पाएगा।

WordPress वेबसाइट में login कैसे करते है?

WordPress login करना चाहते हो तो आप डायरेक्ट url में अपनी वेबसाइट के नाम के आगे /wp-admin/ लिखे और खोजे या Enter करें।

उदाहरण के लिए मेरी वेबसाइट का नाम url ; https://gonewzy.com है जब मैं अपने वर्डप्रेस के डेकबोर्ड तक या पैनल को खोलना चाऊंगा में https://gonewzy.com/wp-admin/ लिखने के बाद इंटर हो जाऊंगा।

उसके बाद Administrator User name और Password डालकर WORDPRESS को login कर पाऊंगा।

Hostinger WordPress log in username and password

तत्पश्चात आप अपनी वेबसाइट पर पोस्ट लेख या अन्य पेज को लिख पाएंगे एवं थीम एवं अन्य कार्य इसी डेकबोर्ड के सहारे हर कार्य कर सकते हैं।

> डोमेन क्या होता हैं।

वर्डप्रेस वेबसाइट की थीम कैसे बदलें Website ki theme kaise change kare

वर्डप्रेस वेबसाइट की थीम कैसे बदलें Website ki theme kaise change kare

जब आप वर्डप्रेस वेबसाइट को बनाकर तैयार कर ले एवं जिसके डिजाइन को अपने अनुसार थीम में सजना चाह रहे हो। तो आपको अपनी वेबसाइट के थीम में चेंज करने की जरूरत पढ़ती है। नीचे थीम परिवर्तन के कुछ चरण निर्देश दिए है उन्हें स्टेप से अनुसरण कराते चलें –

  1. वर्डप्रेस वेबसाइट के डेसबोर्ड को लॉगिन करे मुख्य वर्डप्रेस डेसबोर्ड तक पहुंचे।
  2. उसमे Appriance ऑप्शन में जाए वहा Themes के ऑप्शन को चुने एवं की क्षण रूखे।
  3. नए पेज ओपन हो जाने पर Add New ऑप्शन के अनुसरण करे।
  4. अब आपको इसमें कई अलग अलग ऑप्शन जैसे Featured, Popular, Latest Favaroits and Feature Filters दिखाई पढ़ते है।
  5. इन सभी में से आप अन्य पसंदीद थीम को चुनाव करे एवं उसे ओपन करके install पर चुने।
  6. जैसे ही कुछ सेकंड्स में इंस्टॉल प्रक्रिया पूर्णता प्राप्त करे अब अब आप अपने थीम को Activate करने के लिए उत्सुक रहे।
  7. Activate करते ही आपको वेबसाइट उस नई थीम में बदल जायेगी तो लीजिए अब आपकी थीम बदल चुकी हैं।

नीचे हम आपको पोस्ट लिखने के कुछ चरण बता रहे है

वर्डप्रेस में पोस्ट कैसे लिखें WordPress me post kaise likhe

वर्डप्रेस में पोस्ट कैसे लिखें WordPress me post kaise likhe

  1. वर्डप्रेस वेबसाइट के डेसबोर्ड को लॉगिन करे मुख्य वर्डप्रेस डेसबोर्ड तक पहुंचे।
  2. WordPress में login करने के पश्चात आपको सबसे पहले डैशबोर्ड में Posts ऑप्शन दिखान देगा उसे चुने।
  3.  इसमें All Posts के नीचे Add New पर दवाएं।
  4. इसके बाद एडिटर ओपन हो जायेगा इसमें आप अपनी पोस्ट तैयार कर सकते हैं।
  5. एक अच्छा सा Title और इसके बारे में नीचे पोस्ट को लिखकर पूर्णता प्राप्त करें और पब्लिक करें।

बेस्ट होस्टिंग कैसे चयन करें How to choose best hosting in hindi

आशा है की आपको ये पेज पसंद आया होगा। आप होस्टिंगर पर वर्डप्रेस वेबसाइट कैसे बनाएं Hostinger par WordPress Website kaise banaye वाली पोस्ट को अपने अन्य संबंधित दोस्तों को भेजे ताकि उन्हें समस्या न हो।

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है Mobile operating system kya hota hai in hindi

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है | Mobile Operating System in Hindi

दोस्तों क्या आपको ऑपरेटिंग सिस्टम के संबंधित कुछ क्या न फल से रखते हैं यदि नही तो कोई बात नही आज जैसे ही इस पेज पर मौजूद कमेंट को पड़ने के बाद आप मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में समझ जायेंगे। आज हम आपको इस पर हर तरह से प्रकार को जो मोबाइल मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम(Mobile Operating System in Hindi) का ज्ञान मिलेगा।

दोस्ती अब हम बिना समय गवाएं आपको इस पेज को प्रारंभ करेंगे एवं आपको जानने के लिए उत्सुक रहें।

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है Mobile operating system kya hota hai in hindi

लेकिन हम उससे पहले आप बता दें की इस पेज के नीचे आप अच्छा अच्छे कॉमेंट जरूर करें तक हमारी टीम आपके सवाल एवं जवाब से रूबरू करवा सकें।

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है ?

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम (Mobile operating system) एक तरह से सॉफ्टवेयर स्वरूप है। इसको आप स्मार्ट फ़ोन में डालकर या इनस्टॉल करके उपयोग में लाते हैं। इस ऑपरेटिंग सिस्टम के आभाव होने पर मोबाइल किसी भी काम का नही और यू कह सकते है की Operating system के बीना मोबाइल कचरा है। आपको बता दें की इससे किसी भी स्मार्ट मोबाइल क्षमता अनुसार का चयन ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा ही किया जाता है।

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम व प्रकार ?

आपको बता दें की मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के कई तरह के प्रकार शामिल है पर हम प्रचलित ऑपरेटिंग सिस्टम्स के बारे में नीचे बताने वाले है –

1. एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम (Android operating system)

अपने जब जिसका नाम पढ़ा होगा वैसे ही आपके गिमाग मे Android स्मार्ट फोन का ध्यान अवश्य आया होगा। तो आप बिलकुल सही सोच रहे है।यह विश्व भर में सबसे ज्यादा चलन वाला एवं सबसे प्रचलित Mobile operating system हैं। इस ऑपरेटिंग सिस्टम को गूगल द्वारा संचालित किया गया।

2. एप्पल ऑपरेटिंग सिस्टम

Android operating system के जैसा ही लेकिन यह सिर्फ एप्पल कंपनी द्वारा बताया जाता है और इसे एप्पल स्मार्ट फ़ोन्स पर ही इस्तेमाल करवाया जाता है। इसे Apple iPhone निर्मित डिवाइस में जैसे आई फ़ोन, स्मार्ट वाच, और लैपटॉप्स हेतु तैयार किया जाता है। आपको बता दें की Android operating के बाद द्वितीय नंबर पर इसी ऑपरेटिंग सिस्टम एप्पल IOS आता हैं।

3. ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम

ब्लैकबेरी का उपयोग ब्लैकबेरी के डिवाइस में होता है इन ऑपरेटिंग सिस्टम्स को रिसर्च इन मोशन कंपनी बनाती है। RIM ब्लैकबेरी के लिए मालिकाना बहुद्देशीय ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) तैयार कराता है, जिससे उपकरणों के विशिष्ट इनपुट उपकरणों का भारी उपयोग करना संभव होता है,

4. विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम

Windows operating system को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी बनाती है। Windows operating system का उपयोग करना दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम की तुलना से बेहद आसान होता है। विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम में बहुत अधिक Software देखें को मिलते है क्योंकि बहुत से लोग Windows operating system का इस्तेमाल करते हैं लगभग 90%  Computer’s में इसका ही अनुसरण करते है।

इस ऑपरेटिंग को छोटे , बड़े , बुजुर्ग के अलावा कोई भी उम्र के लोग इसको आसानी से अनुसरण सकते हैं। क्योंकि यह काफी सरल व आसान है। अपने पुराने वर्जन को नवीन वर्जन में भी सपोर्ट करता है। अपने पुराने वर्जन के Features को भी Update करता है। सभी सुविधाएं चित्रात्मक के तहत मिलती है।

निष्कर्ष: मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम

अब आशा करते है की आपको मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम Mobile operating system क्या है? संबंध में इनफॉर्मेशन दी। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो, तो इसे कृपया दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और किसी सवाल के लिए नीचे कमेंट बॉक्स में अपने शब्दों को रचें।

बेस्ट होस्टिंग कैसे चयन करें How to choose best hosting in hindi

How To Choose A Best Hindi Hosting – बेस्ट होस्टिंग कैसे चुने

किसी भी वेबसाइट को सर्च इंजन रिजल्ट्स पेजेस (SERPs) के अंदर उच्च स्थान पर पहुंचना अच्छे बात है। लेकिन इसके लिए आपको अच्छी और गुड क्वालिटी को Hosting सर्विस को चुनना भी जरूरी है। यदि आपसे कोई यह पूछे की कोनसी होस्टिंग बेस्ट है, तो आप किसी भी कंपनी का नाम ले पाएंगे। जब आप ब्लॉगिंग की फील्ड में नए हो, लेकिन जैसे ही आप कुछ समय ब्लॉगिंग की फील्ड में देते हो तो, आपको अच्छी होस्टिंग के लिए अनुभव हो जाता है।

कुछ नए हमारे भाई लोग जल्दबाजी और सस्ती होस्टिंग खरीदने के चक्कर में अपनी वेबसाइट को ऐसी होस्टिंग कंपनी में होस्ट करवा देते हैं, जो आगे चलकर उन्हें परेशानी का सामना करने पर मजबूर करती है।

एक रिसर्च से 2020 तक के आंकड़ों अनुसार पता हुआ है, कि लगभग 102+ करोड से भी ज्यादा वेबसाइट इस दुनिया में होस्ट हो चुकी है। और यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन हर रोज बढ़ता चला जा रहा है। ऐसे में आपको आने वाले फ्यूचर में होने वाली कठिनाइयों और समस्याओं से बचने के लिए अच्छी से अच्छी होस्टिंग कंपनी का चयन करना चाहिए। आज हम आपको बेस्ट होस्टिंग का चयन कैसे करें, इसके बारे में कुछ बिंदुओं पर चर्चा है तू जानकारी देंगे।

यदि आप एक अच्छी होस्टिंग का चयन करते हैं, तो आपको वेबसाइट स्पीड स्लो होने की समस्या, वेबसाइट के लिंक में होने की समस्या, वेबसाइट को मैनेज करने में होने वाली समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।बेस्ट होस्टिंग कैसे चयन करें How to choose best hosting in hindi

यदि आप आने वाले समय में या होस्टिंग को खरीदने और अपनी वेबसाइट के लिए होस्टिंग परचेज करने के लिए उत्सुक है। तो हम आपको इस पेज पर 8+ प्लस ऐसे कुछ तथ्यों को बताएंगे। जिन को ध्यान में रखकर आपको होस्टिंग लेनी चाहिए। एवं हम नीचे आपके लिए रिकोमेंडेट होस्टिंग कंपनी के नाम एवं उस पर विशेष ऑफर कैसे प्राप्त करें, यह भी सबसे लास्ट में, इस पेज पर बताएंगे तो आप पूरे पेज को ध्यान से स्टेप बाय स्टेप पढते चले।

बेस्ट होस्टिंग का चुनाव कैसे करें 8+ Important Factors

आपको बता दें की किसी भी साइट के लिए होस्टिंग का उतना ही ज्यादा महत्व है जितना की किसी कंप्यूटर सिस्टम के भीतर C.P.U का होता हैं। इसलिए साइट को बेस्ट होस्टिंग कंपनी में अच्छे प्लान के चुनाव से ही बनाने का प्रयास पहले ही करना चाहिए। ताकि आने वाले समय ने रुकावट न उत्पन्न न हो।

कोई भी वेबसाइट अपनी गति को तेज होने से विजीटर्स की संख्या ने इजाफा देखती एवं सर्च इंजन में रैंकिंग भी हासिल करती हैं। आज अप इस पेज पर कुछ ही शब्दों के बार 8+ ऐसे कुछ बेस्ट बेस्ट होस्टिंग का चुनाव कैसे करें इसके संबंध ने मुख्य भूमिका निभाने वाले तथ्यों को जानेंगे –

1. Load Time

हर वेबसाइट की लोडिंग स्पीड होस्टिंग पर आश्रित रहती हैं। Load Time Hosting का मुख्य फैक्टर है। यदि आप किसी जल्दबाजी से सस्ते के चक्कर में गलत होस्टिंग का चयन कर लेते है तो आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। परिणाम आपके साइट की स्पीड स्लो हो सकती हैं।

एवं इसी कारण काफी वेबसाइट अपने ट्रैफिक में कमी पाती हैं, एवं कुछ दिनों में आपकी रैंकिंग डाउन होने की नौबत आ जाती हैं। इसलिए आपके आशय है की किसी भी होस्टिंग कंपनी से Purchase करे लेकिन आप अपने ज्ञान एवं आने वाले रुकावटों से निपटा जा सके ऐसे प्रयास करें।

आपको बता दें एक अच्छी होस्टिंग पर जब आपको वेबसाइट होस्ट होती है उस समय आपकी साइट रफ्तार से लोड होती है जिससे Visitors को समस्या नही होती और SERPs में रैंकिंग की बढ़ती हैं।

2. Uptime

आपको अपने वेबसाइट को किसी भी होस्ट प्रोवाइडर कंपनी में सजाने से पहले उसका Uptime अवश्य चेक करना चाहिए । ताकि आप अपनी वेबसाइट को हर समय ऑनलाइन रख पाए एवं अपटाइन रखने से विजीटर्स पर विश्वास बनाता है ।

कई लोग अपनी वेबसाइट को गलत होस्टिंग कंपनी में होस्ट करवा देते है उसका Uptime की जांच भी करते है। और परिणाम यह होता है की उनकी Website का सर्वर डाउन हो जाता है। इसे Downtime कहते हैं। जब आपकी वेबसाइट Downtime में रहती है उतने वक्त आपके विजीटर्स की काफिर समस्या का सामना करना पड़ता है। अतः आप Uptime अच्छा जिस होस्टिंग का हो इससे ही होस्टिंग खरीदे।  99.9% Uptime वाली होस्टिंग हिस्टिंगर के लिए आप पढ़ सके हैं

3. Intial Server Location

जब आप किस भी होस्टिंग कंपनी से होस्टिंग खरीदे उस समय आप Intial Server Location का ध्यान अपने अंदर मौजूद रखे। क्योंकि यह बहुत अहम हिस्सा हो सकता हैं। और यह ज्यादए ट्रैफिक पाने का उचित तरीका साबित हो सकता हैं।

जब आप अपनी वेबसाइट बनाने का सोचे आप पहले यह ध्यान रखे की आपकी वेबसाइट पर ज्यादा लोग किस देश या किस हिस्से से आने वाले है। आप उसे ध्यान में रखे एवं उसके सबसे नजदीक वाले Server की लोकेशन पर ही अपनी होस्टिंग चयन करें। यह आपको हम इसलिए बता रहे क्योंकि आप जितने नजदीक सर्वर पर होस्ट करेंगे आपकी Website Fast Load होने के लिए उत्सुक रहेगी। इसके आप अपनी गति को तेज एवं ज्यादा विजीटर्स संभाल ले ऐसे होस्टिंग चयन करें।

4. 24×7 Support

एक अच्छी होस्टिंग कंपनी आपको 24×7 Support प्रदान करता है। आपको इसके लिए अवश्य खोजबीन करना चाहिए। क्योंकि हम आपको जो इस पेज पर सभी मुख्य Factors बता रहे है उनमें से एक यह भी विशेष स्थान रखता हैं।

कभी कभी कुछ Technical समस्याओं या कुछ अमानवीय लोगो की वजह से आपकी वेबसाइट को क्षति पहुंचती है तो उसे संभालने हेतु, आपको Customer Service Support की जरूरत होती है। यह जानने और समझने का विषय हैं । नजरंदाज ना करे।

आपको बता दें की इस सपोर्ट के जरिए आप कॉल , चैट, या ईमेल सुविधाओं से अपनी वेबसाइट पर आने वाले प्रॉब्लम्स को होस्टिंग प्रोवाइडर तक पहुंचता सकता है। कुछ कंपनियां आपको बहुत जल्दी आपको प्रॉब्लम्स के पता लगाने एवं निराकरण करने के लिए उत्सुक रहती हैं। सिर्फ 30 मिनट में ये कंपनी आपको होस्टिंग की समस्या पर कार्य प्रारंभ कर देती हैं एवं ईमेल पर भी सुलझाने का प्रयत्न करती है।।

5. SSD Based

SSD यानी Solid State Drive आपके डाटा को स्टोर करने में सक्षम है और इसमें आपकी वेबसाइट को गति ले लोड करवाने के गुण है। एक अच्छी होस्टिंग प्रोवाइडर आपको SSD Based होस्टिंग को चयन के ऑप्शन उपलब्ध करवाते हैं।

आपको बता दें की SSD Based Hosting पर बनी वेबसाइट की स्पीड HDD Based Hosting की तुलना में कई गुना फास्ट खुलती हैं। इसलिए आप SSD Based Hosting को चुने।

जैसे की अपने ऊपर भी पढ़ा होगा की को वेबसाइट फास्ट लोड होती है उसकी रैंकिंग सर्च इंजन में ऊपर रहती है। तो यह भी आपको मुख्य रहता है की SSD Based Hosting से आप आपकी वेबसाइट को First Page पर Rank करवा सकते हैं।

6. C Panel

किस होस्टिंग में आपको C Panel कैसा मिल रहा है  इसका ज्ञान एवं समझ होना जरूरी है। आपको बता दें की C Panel एक Linux Base Web Hosting Control Panel हैं। जिसमे आपको अच्छा User Interface प्रदान करवाता हैं। वैसे आपको बता दें की आप वेबसाइट ही C Panel के बगैर भी रन किया जा सकता हैं। लेकिन आपको यह जानना जरूरी है की यह बहुत से टूल के Install की प्रक्रिया सिर्फ एक क्लिक के जरिए करवाया जा सकता हैं। इसलिए आपको यह c पैनल का जरूरत है ।

एवन वेबसाइट के बैकअप अनुसार किसी भी समय सिर्फ एक बैटन से Backup प्राप्त किया जा सकता हैं।

वेबसाइट के C Panel का उपयोग बहुत आसान एवं सुलभ बनाता हैं । इसलिए आप Hosting का चयन करते टाइम इसका ध्यान अपने दिमाग में अवश्य लाए।

7. Security

जब भी आप सस्ते या कमजोर होस्टिंग प्रोवाइडर पर अपने वेबसाइट को तैयार करते है। तो आप Hosting Website के Security Feature को जरुर समझे एवं आने प्रयास को लेकर जुड़े रहे। आप जितनी Cheap Hosting Plan वाली कंपनी चयन करते है उसमे आप को हो सकता है की कमजोर सुरक्षा मिले उसका ध्यान बनाकर रखें।

आप अच्छी होस्टिंग प्रोवाइडर का चयन करते है तो आपके विजीटर्स को किसी भी तरह की कोई समस्या का सामान नही करना पड़ेगा। और आपकी साइट भी अमानवीय लोगो से बची रहेगी। इसलिए हमारे होस्टिंग चयन वाले इस पेज पर इस बिंदु को ध्यान में रखकर एवं लिखा गया है।

8. Storage Data Amount

जब आप अच्छी होस्टिंग के प्लान को चुनते है, तो आप उसमे अच्छे प्रकार Storage Data Amount भी पाते है । आप उस हेतु भी Website Storage से उच्च मात्रा में होना जरूरे है। जब आप किसी लैपटॉप या मोबाइल या कंप्यूटर लेता हैं। तब आप Storage Capacity को चेक करे तो आप कितनी GB स्टोरेज का चयन है जैसे 512 GB या 1 TB है। उसी तरह होस्टिंग में भी Storage के ऑप्शन मौजूद होते हैं। अच्छी एवं ज्यादा स्टोरेज को चुनने के प्रयास रखें।

कुछ ऐसे होस्टिंग प्लेन है जिनमे आपको Storage Data Amount Website Storage के लिए Unlimited Storage के लिए होस्टिंग उपयुक्त है। का चयन करे।

9. PHP Version

अपनी यह PHP Version के अनुसार आप यह चेक करने के प्रयास करें। एवं हमें अवश्य रूप से PHP Version को देखकर आप प्रयास करें एवं पूर्ण जांच अनुसार ही आप आप अपने होस्टिंग सुविधाओं को चुने।

शायद आप नही जानते की PHP एक तरह से Server Site Scripting Language है । जिसका डेटाबेस से जुड़कर उपयोगकर्ता के Dynamic को बताता है। जिससे यह Fast load करवाने में सहायक होती हैं। एवं आपके वेस्ट के डाटा को Encrypt करके Data Use हो रहा है। जब वेब पेज पर इस Dataflow को भी Encrypt कर सकते हो।

फाइल को ओपन करने और बंद करने एवं डाटा मिटने के लिए PHP Version अधिक हो जिससे आप कुछ एडिशनल Features के फायदें उठा सकें।

10. Bandwidth

जैसे की हम आपको बेस्ट होस्टिंग प्रदाता एवं जानकारी के लिए इस पेज को यह तक पहुंच चूके है। तो यह Bandwidth होस्टिंग में महत्व रखने वाला ऑप्शन हैं। अपनी होस्टिंग खरीदते समय यह प्रयास रखे की Bandwidth ज्यादा हो।

एक निश्चित टाइम में जितना डाटा एक कंप्यूटर से दूसरे स्थान पर Transfer किया गया है। इसे मापने की विधि को ही Bandwidth बोलते हैं। इसे Bits per Second में मापते है। Bandwidth को Network Bandwidth, Data Bandwidth और Digital Bandwidth बोलते है।

अपने जिस होस्टिंग का चयन किया वह आपको कम Bandwidth प्रदान कर रही है तो आपको इसके कारण कई सारी समस्याएं आने वाले समय में आ सकता हैं। और Server Down जैसे होने की उपलब्धता आ सकती हैं। जिस कारण आपके विजीटर्स को नुकसान हो सकता हैं।

इसलिए आपको ऐसी होस्टिंग लेनी चाहिए जिसका Bandwidth ज्यादा और क्वालिटी वाला हो क्योंकि Bandwidth जितना अधिक होता है। Website उतनी ही ज्यादा Fast काम करती है। तथा Data भी अधिक मात्रा में Transfer किया जाता है।

निष्कर्ष: बेस्ट होस्टिंग कैसे चयन करें How to choose best hosting in hindi

अपने बेस्ट होस्टिंग प्लान को चुनने से पहले क्या खाया बिंदुओ को देखना चाहिए एवं नए ब्लॉगर को क्या ध्यान देना चाइए यदि आने ध्यान से पढ़ा होगा तो समझ आ चुका होगा । अब आप चाहे तो आइए पेज को जरूरतमंद दोस्तों तक पहुंचाए या शेयर करे । इसके अलावा उनको भी भेजे जो होस्टिंग खरीदने का सोच रहे है।

उच्च गुणवत्ता वाली होस्टिंग आपके वेबसाइट पेज को पहले नंबर पर रैंक करवाने में मदद प्रदान करती हैं। और Search Engine Result Pages (SERPs) पर Wesbite को उच्च Rank से आपके पास ज्यादा ट्रैफिक आयेगा।

डोमेन नाम क्या है Domain name kya hai

डोमेन नाम क्या है? Domain name kya hai

जब भी कई व्यक्ति ब्लॉगिंग की बात करे वह हमें यह जरूर बोलता है की तुम्हे डोमेन नाम लेना पड़ेगा । फिर हम सोचते है की यार ये डोमेन नाम क्या है? क्या होता है? या कहा मिलता होगा । ऐसा कई सवाल हमारे दिमाग में उठते हैं । तो आज हमारे इस लेख में आपको ऐसे हर तरह की जानकारी देने के लिए ही हमारी टीम इस पेज को बना रही है ।

कोई भी नई वेबसाइट को बनाएं उससे पहले डोमेन नाम की आवश्यकता हैं । आगे हम बिना समय लिए बताए की डोमेन नाम क्या होता है और कैसे काम करता है?

डोमेन नाम क्या है Domain name kya hai

डोमेन नाम क्या होता है Domain name kya hota hai

हम किसी भी वेबसाइट को जिस नाम से पुकारते गई वह डोमेन नाम होता हैं । जैसे google यानी गूगल के डोमेन का नाम google.com । जिसके द्वारा किसी वेबसाइट को इंटरनेट पर आसानी से खोजा या पहचाना जा सकते वह डोमेन नाम हैं ।

हमारे मानव जाति ने व्यक्ति को जानने एवं पहचान के लिए नाम दिए जाते गई । उसी प्रकार इंटरनेट या डिजिटल दुनिया में एक वेबसाइट की पहचान हेतु उसे डोमेन नाम दिया जाता है ।

सर्च इंजन जैसे गूगल, बिंग या याहू के खोज बॉक्स में इसी डोमेन के नाम को लिखकर वेबसाइट तक पहुंच मार्ग तैयार किया जाता हैं । एवं इसके बार आने वाले परिणाम में उसे डोमेन से संबंधित लेख ही आते हैं ।

डोमेन नाम का आविष्कार क्यों किया गया Domain name ka Abishkar kyon hua

आपको बता दें की कैस शुरुआत ने किसी भी वेबसाइट का कोई डोमेन नाम नही हुआ करता था । उस समय इसे सिर्फ IP Address से ही पहचाना जाता था ।

अरे यार अब ये IP Address क्या है । ऐसा सोचना बंद करिए क्योंकि नीचे हम IP Address के बारे ने भआई बताने वाले है । अपना पढ़ना जारी रखे !

IP Address एक विशेष तरह की नंबर्स की श्रृंखला होती है जैसे 123.376.321.157 ।

IP Address के बारे में बता दें की यह साधारण भाषा में एक वेब सर्वर का पता होता हैं । एक आईपी एड्रेस यह दर्शाता है, की इंटरनेट पर मौजूद कोई वेबसाइट किस वेब एड्रेस पर उपलब्ध है । आपको बता दें की आज भी यह IP Address हर किसी वेबसाइट के लिए होते है । लेकिन यह जैसे जैसे समय बिता ये लोगों को याद रखने में मुस्किले उत्पन्न हुई । इसी समस्या के निवारण हेतु डोमेन नाम (Domain name) इंटरनेट की दुनिया में आया ।

हम आपको नीचे बताए की डोमेन नाम कैसे काम करता है । लेकिन उससे पहले बता दें की डोमेन नाम को Background में किसी भी IP Address से कनेक्ट कर दिया जाता हैं । और जब भी कोई विजिटर उस पर आता है । तो इसे उस नंबर्स वाले IP Address को याद रखने या लिखने को कोई जरूरत नही । बल्कि वह अब सिर्फ उस आईपी एड्रेस से जुड़े डोमेन के नाम को डालने और याद रखने की जरूरत है । जैसे 123.376.321.157, 123.376.321.158 की जगह पर abc.com, example.com ।

> होस्टिंगर की होस्टिंग सर्विस के Hindi Review

डोमेन नाम कैसे काम करता है?

आपको ऊपर बता गया था की बैकग्राउंड में डोमेन नाम जो आईपी एड्रेस की जगह कनेक्ट कर दिया जाता हैं । इसे कनेक्ट करने के लिए DNS रिकॉर्ड्स, Nameserver, Cname, और a record की मदद से जोड़े जाते हैं । आप इन सभी नामों को सुनकर आश्चर्य ने ना पढ़े । ये सभी आसन है जैसे किसी छोटे से फॉर्म को भरना हो, उसी तरह ये सभी जानकारी डालना पढ़ता हैं ।

जब कोई व्यक्ति आपके वेबसाइट के डोमेन नाम को अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र की खोज बॉक्स में लिखे तो आपका ब्राउज़र सबसे पहले DNS (Domain Name System) को एक संदेश की तरह Request भेजता है । DNS आपके ब्राउज़र Request के अनुसार इस IP Address को डोमेन नाम में बदल कर । उस ब्राउज़र में बदला गया डोमेन नाम को वेब एड्रेस या वेब सर्वर के साथ जुड़ने के लिए Get Request पहुंचता हैं ।

Get Request मिलने के पश्चात वेब एड्रेस या वेब सर्वर उस वेबसाइट की एक प्रतिलिपि को ब्राउज़र में पहुंचा देता हैं ।

आपका Browser उस पहुचाई गया वेबसाइट की प्रतिलिपि को प्राप्त करता हैं । और आपके परिणाम को नए डोमेन नाम के साथ वेबसाइट को खोलने के लिए प्रेरित हैं ।

डोमेन नाम की आवश्यकता क्यों होती है Domain name ki aavshykta kyo hoti hai

मान लीजिए आप कोई वेबसाइट बनाना चाहते है । चलो कोई बात नही! आप वेबसाइट तो बना लेंगें, किंतु उस वेबसाइट को लोग इंटरनेट पर खोजेंगे कैसे उसके लिए उसका नाम किसी भी विजिटर या यूजर को बताना जरूरी है । डोमेन नाम इसी काम में आपकी मदद करता है । Domain name किसी भी वेबसाइट को एक यूनिक नाम प्रदान करता हैं जिससे लोगों को वेबसाइट तक पहुंच पाना आसान रहता है ।

आपको बता दें कोई भी यूजर आपकी वेबसाइट को इस डोमेन नाम के बगैर ढूंढ नही पायेगा । किस वेबसाइट को नाम प्रदान करने के अलावा भी वेबसाइट के लिए अन्य कई लाभ उत्पन्न करता है –

विश्वसनीयता बढ़ने ने मदद करें – अपना स्वयं का नाम होना एक बेवसाइट को पेशेवर दिखाने में हेल्प करता हैं । पर यदि आप फ्री डोमेन नाम का चुनाव करते है । तो वह वेबसाइट पेशेवर नहीं दिखेगी और लोगो का विश्वास भी उतना अधिक नही पैदा कर पाती ।

डोमेन ब्रांड की visibility को बढ़ाता है – कुछ लोग अपने बिसनेस को ऑनलाइन इंटरनेट के तरीके से संपन्न करते हैं । उस वक्त एक अच्छा डोमेन नाम आपके बिसनेस ब्रांड की visibility को बढ़ाने में सहायक होगा ।

जब आपका ब्रांड का नाम आपके डोमेन नेम से जुड़ा हुआ रहता है । तो लोगो को जल्दी से याद रखने में एवं दोबारा आने की संभावना भी बढ़ती हैं ।

इंटरनेट उपलब्धता को गतिशील बनाता है – आपकी साइट किसी भी जगह पर किसी भी देश या अन्य देशों में हो फर्क नही पढ़ता । आपकी वेबसाइट का डोमेन नाम बदलता नही हैं ।आप जिस तरफ भी जाए आप आसानी से अपने काम को बढ़ावा देने के लिए डोमेन नेम से गतिशील बना सकते हैं ।

डोमेन नाम के उदाहरण क्या है?

डोमेन नाम के बहुत सारे examples हो सकते हैं जैसे कि :-

youtube.cominstagram.com
google.compaypal.com
facebook.comwikipedia.org
amazon.comtwitter.com

डोमेन नाम के प्रकार Types of domains in hindi

आपको पहले ही बता दें की डोमेन नेम तीन प्रकार के होते है जिनमे से आपको व्यक्त करने में हम नीचे प्रदान कर रहे हैं –

1. Top Level Domain (TLD)

2. Second-Level Domains

3. Third Level Domains

1. Top Level Domain (TLD)

इस डोमेन का नाम इंटरनेट की डीएनएस क्रम अनुसार शीर्ष में आता है । यह कोई भी नाम के दाए वाले हिस्से को व्यक्त करता है जैसे instagram.com एक डोमेन है इसका दाया हिस्सा .com है यह Top Level Domain (TLD) है ।

आपको बता दें की अधिकतर ऐसे डोमेन कमर्शियल वेबसाइट्स हेतु आदेश किया जाते हैं । आपको जाकर अच्छा लगेगा की इसकी पहुंच विश्व भर में होती है । इन्हे Url Extension के रूप में व्यक्त करते हैं ।

नीचे तालिका में कुछ टॉप Top Level Domain के उदाहरण को देखते हैं ।

1.commercial.com
2.organization.org
3.network.net
4.education.edu
5.government.gov
6.business.biz
7.information.info
8.name.name

Top Level Domain (TLD) के अंर्तगत 2 भाग / 2 प्रकार आते हैं ।

a. Country Code Top Level Domains

इसके नाम को पढ़कर ही कुछ लोग अंदाजा लगा लेता है की यह देश के Two Letter ISO CODE के अंतर्गत तैयार किया गया हैं ।आपको बता दें को हर देश का अपना एक ccTLD होता हैं । किंतु देश आने ccTLD का इस्तेमाल करता है । इस हेतु कोई रोक टोक नही हैं ।

Country Code Top Level Domain इस्तमाल करने से कई फायदे होते है जब आप किसी एक विशेष देश के लोगों को टारगेट करते हुए लेख प्रकाशित करते हैं ।

जैसे कि अगर आप सिर्फ इंडिया देश के विषय या लोगों के बारे में लिखते हैं, तो आप “.in” ccTLD का उपयोग कर सकते हैं ।

Country Code Top Level Domains के उदहारण

1..usUnited States
2..inIndia
3..chSwitzerland
4..cnChina
5..ruRussia
6..brBrazil

b. Generic Top-Level Domains

Generic का अर्थ है- साधारण या फिर सामान्य । आप यह मत समझ लेना की ये बिलकुल ही साधारण तरीके के डोमेन है । यह ऐसे नही हैं । कई सारी सम्मानित और बड़ी वेबसाइटों द्वारा किया जाता है ।

Generic Top-Level Domains के उदहारण 

.com.edu.gov
.int.mil.net
.org

2. Second-Level Domains

DNS क्रम ने TLD से नीचे में वाले ये Second-Level Domains होते है । किंतु आपको बता दें ये एक डोमेन नाम से वर्णन करते हुए । अपने क्रिया सम्मान करते हैं । जैसे कि gonewz.com में (gonewz) Second-Level Domain है ।

Second-Level Domain एक डोमेन नाम का सबसे आसानी से याद रहने वाला भाग होता है । और यह वह भी होता है जिसके लोगो द्वारा वेबसाइट पर पहुंचे एवं ब्रांड स्थापित करने का भी चयन हैं ।

3. Third Level Domains

यह डोमेन नाम इंटरनेट के DNS क्रम में Second Level Domain के नीचे आते हैं । जैसे कि www.gonewzy.com में www एक Third Level Domain है ।

इसके आगे अब हम आपको सबडोमेन के बारे में कुछ बाते बताए क्योंकि यह भी डोमन का ही भाग है ।

सबडोमेन नाम क्या होता है Subdomain name kya hai

आपको बता दें की ये आपके द्वारा खरीदे गए main domain के ही एक अंग या हिस्सा या अंश हैं । आप इस सब डोमेन को अपनी वेबसाइट के डोमेन के नीचे कार्य करने वाली प्रक्रिया हैं ।

आपको यह जानकारी खुशी होगी की Subdomain को खरीदने की जरूरत नहीं पढ़ती है । आप केवल मुख्य डोमेन को खरीदे उसके बार जितने आप चाहे इस डोमेन अनुसार Subdomains डिवाइड कर सकते हैं ।

जैसे – सोचिए यदि आपका मुख्य डोमेन gonewzy.com है । पर उस मुख्य डोमेन के अनुसार Subdomain बनाना चाह रहे हो, तो आप मुख्य domain का एक सब डोमेन जैसे (shop.gonewzy.com) के नाम से बना सकते हैं ।

और इस सब डोमेन में “shop” Subdomain के रूप में कार्य करता हैं । अपने अनेक Subdomain की रचना कर सकते है ।

डोमेन नाम का चुनाव कैसे करें?

कुछ ऐसे बाते मुख्य है जिन जव भी आप डोमन खरीदें उनका विशेष ध्यान रखते हुए एक अच्छे डोमेन नाम का चुनाव कर सकते हैं, ये नीचे है –

  1. उस डोमेन नाम लेने से पहले उस डोमेन के इतिहास के जानने का प्रयास करे ।
  2. कोशिश हमें .com TLD लेने की रखे ।
  3. डोमेन में टारगेट वर्ड्स के उपयोग का प्रयास करें ।
  4. डोमेन नेम छोटा खरीदें ।
  5. अपने कंटेंट अनुसार डोमेन नाम का चुनाव करें ।
  6. ऐसा डोमेन नाम ले जिस बोलने और लिखने ने आसानी रहे ।
  7. सबसे अलग और ब्रांडेड प्रकार के लेने का प्रयास करे ।
  8. स्पेशल characters जैसे hyphen और numbers जैसे डोमन में नही लेना चाहिए ।
  9. डोमेन नाम खरीदने से पहले नेम जनरेटर के उपयोग से अच्छे डोमेन नाम के आईडिया प्राप्त करें ।
  10. अपना डोमेन नाम जल्दी चुनाव करे, इससे पहले कि कोई अन्य व्यक्ति खरीदे आप खरीद लें ।

डोमेन नाम कैसे खरीदें Domain name kaise kharide

जब भी आप डोमेन नाम खरीदने का प्रयास करे आप डोमेन रजिस्ट्रार वेबसाइट से खरीदना पड़ेगा ।आपको बता दें की इंटरनेट मार्केट में कई रजिस्ट्रार ऑनलाइन मौजूद हैं । किंतु हम नीच कुछ विशेष को तालिका में बता रहे हैं –

Domains.GoogleBigrockHostGator
GoDaddyBluehostNamecheap
Domain.comShopifyName.com
Register.com1&1 (iONOSInMotion Hosting

डोमेन नाम को सर्वर या फिर होस्टिंग से कैसे जोड़ें Domain name hosting se kaise connect kare

आपको बता दें की कैसे होस्टिंग प्रदाताओं के साथ डोमेन को जोड़ना बहुत आसान हैं । लेखों फिर भी हम आपको एक विशेष डोमेन प्रदाता कंपनी GoDaddy से डोमेन खरीदने के बाद डोमेन को कनेक्ट करने की प्रक्रिया के कुछ चरण आपको बताएंगे –

GoDaddy अकाउंट को लोगों करने के बार आपको management page पर जाना होगा । पाई

डोमेन को सेलेक्ट करने के बाद उस डोमेन नाम के ‘Manage DNS’ पेज पर पहुंचे ।

‘Manage DNS’ पेज पर पहुंचने के बाद ‘name servers’ पर जाएँ ।

‘name servers’ के बाजू में आप कुछ ऐसा “using default name servers” लिखा हुआ दिखाई देंगे ।

इसे चेंज करने के लिए ‘change button’ पर क्लिक करें और उसे ‘custom’ मोड में सेट कर दें ।

तत्पश्चात उसमें अपने होस्टिंग प्रदाता द्वारा उपलब्ध कराए गए ‘name servers’ को डालें और सेव कर दें ।

आपका डोमेन नाम GoDaddy के होस्टिंग के साथ जुड़ जाएगा ।

समापन : दोस्तों आप यदि हमारे इस पेज पर बताए गए निर्देशों एवं जानकारी जो की डोमेन नाम क्या है Domain name kya hai है । उसे आप आसानी से समझे हो तो कृपया कमेंट करके बताए एवं आप इसे अन्य जरूरतमंद दोस्तों को भेजे ।

कंप्यूटर की परिभाषा क्या है Computer ki paribhasha kya hai

कंप्यूटर की परिभाषा क्या है – Computer ki paribhasha kya hai

Computer ki paribhasha kya hai? ऐसे कई सारे सवाल लोग इंटरनेट एवं अन्य जगहों जैसे यूट्यूब चैनल के माध्यम से पहुंच कर पढ़ते हैं। कंप्यूटर दैनिक जीवन की जरूरत से हमारी जिंदगी का इस अहम हिस्सा बन गया है। उसके उपयोग के बिना अधूरी सी रह जाती है हमारी जिंदगी। तो आज हम इसी कंप्यूटर के बारे में जानेंगे और पढ़ेंगे।

कंप्यूटर की परिभाषा हिंदी में!

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसे हम कई कार्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं। हिंदी में बताए की गणक या संगणक भी बोलते है। इसकी गणना काल बहुत सरल एवं आसन है इसके लिए यह काफी अच्छी गति प्रदान करने में सक्षम है। चुकी इसका नाम अंग्रेजी के एक शब्द compute बना हुआ हैं जिसका मतलब अर्थ गणना करना हैं।

इसका इस्तेमाल अपने क्षेत्र की आसानी प्रदान करता है । इस पर कार्य को सरल किया जाता हैं। इनपुट डिवाइस से इसमें संदेश भेजे जाते हैं। एवं आउटपुट से इसके संदेशों को प्राप्त किए जाते हैं। सीपीयू में सभी क्रियाएं कार्य संपन्न होती हैं। निर्देश या सूचनाओं को मॉनिटर पर व्यक्त करते है, जो आउटपुट डिवाइस हैं।

कंप्यूटर क्या है। कंप्यूटर की फुल फॉर्म कंप्यूटर की विशेषताएं

अब सवाल यह है की इनपुट डिवाइस, आउटपुट डिवाइस, या प्रोसेस क्या है। तो घबराने की जरूरत नही ! नीचे वे सभी तथ्य आ रहे हैं।

इनपुट डिवाइस (Input Device) – निर्देश सूचना या अपने द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों को इस इनपुट डिवाइस की मदद से ही कंप्यूटर में उतारा जाता हैं। जिससे की कंप्यूटर इस पर अपने गणना एवं अन्य स्रोतों से जानकारी इक्कठा करके आउटपुट प्रदान कर पाएं।

प्रोसेस (Process) – अपने अंदर मौजूद कुछ सॉफ्टवेयर से हार्डवेयर की मदद लेकर जब निर्देशों के अपने क्रिया करते हुए cpu पाने कार्य कर कर रहा होता है, वह प्रोसेस (Process) हैं।

आउटपुट डिवाइस (Output Device) – जब भी हमरे द्वारा दिए गए निर्देशों को कंप्यूटर पढ़ लेता है फिर वह उसके तरफ से रिजल्ट देने के लिए तैयार रहा है तो उन रिजल्ट के जिस डिवाइस पर दिखाया या प्राप्त किया जाता है वह आउटपुट डिवाइस हैं ।

कंप्यूटर में मौजूद दो प्रमुख बुनियादी घटकों

हार्डवेयर (Hardware) – हमरे निर्देश जा हम कीवर्ड से कंप्यूटर के अंदर फिट करते तो वह करिए जब भी संपन्न होती है तो वह किसी न किसी भौतिक उपकरण में यानी जिसे हम छू सके ऐसे डिवाइस में होती है। उस भौतिक डिवाइस को हार्डवेयर वाला भाग कहते है। इसे जब छूने की बात की है तो एक दिमाग कई कई उपकरण को कंप्यूटर के लगाते है उनकी छवि आ रही होगी जैसे हार्ड ड्राइव, माउस, सीपीयू, कीबोर्ड, स्क्रीन इत्यादि तो आप सभी महसूस कर रहे है। या सभी हार्डवेयर के भी भाग हैं, जिन्हे कंप्यूटर में लगाया गया है।

सॉफ्टवेयर (Software) – आपको बता दें की ऊपर जी हमने हार्डवेयर उपकरण पढ़े उनका कोई अस्तित्व नही है यदि सॉफ्टवेयर न हो। सॉफ्टवेयर के हम न ही देख सकते है और न ही छू सकते। उसे तो सिर्फ हार्डवेयर उपकरण पर रन किया जा सकता हैं। हमरे द्वारा दिया गए निर्देशों को सॉफ्टवेयर ही हार्डवेयर तह पहुंचता है एवं आगे की क्रियाएं इसी के अंतर्गत होती है। सॉफ्टवेयर के तहत ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन आते हैं। आपको बता दें की कंप्यूटर को सुचारू रूप से कार्य सिद्ध करने हेतु हार्डवेयर की जितनी जरूरत है उतनी है सॉफ्टवेयर की भी जरूरत होती हैं।

कंप्यूटर के प्रकार Types of computer

दोस्तों इतिहास में प्राचीन समय से कई अलग अलग प्रकार के कंप्यूटर को लाया गया है और समय समय पर अपडेट करके उन्हे नए स्वरूप में ढाला गया है। हम इन्हें कार्य करने की पद्धति या प्रणाली के अनुसार कंप्यूटर को नीचे दिया अनुसार तीन प्रकारों में बांटा गया है –

1.एनालॉग कंप्यूटर
2.डिजिटल कंप्यूटर
3.हाइब्रिड कंप्यूटर

1. एनालॉग कंप्यूटर (Analog computer) – पुराने समय से ही भौतिकी के मात्रकों के मापन में उपयोग में लाए जाते है। एनालॉग कंप्यूटर कहलाते हैं। तापमान, दाब, ऊंचाई, लंबाई जैसे उपक्रम की परिमाप निकलने हेतु ऐसे एनालॉग कंप्यूटर (Analog computer) के इस्तेमाल किया जाते हैं। एनालॉग कंप्यूटर विज्ञान एवं कई अन्य तकनीकों के हिसाब में बहुत ज्यादा क्षेत्र में अपनाते हैं। भौतिक विज्ञान की दशा में इसके फैलाव अधिक हैं।

2. डिजिटल कंप्यूटर (Digital computer) – ऐसे अंकों के गणनाओं हेतु डिजिटल तकनीक से बने कंप्यूटर का ही इस्तेमाल होता हैं। यकं मुख्य रूप से इनपुट और आउटपुट प्रदान करके अपनी क्रियाओं को समापन करे वह डिजिटल कंप्यूटर हैं। मशीनी भाषा या Binary Code (0, 1) के इस्तमाल इन्ही सब कंप्यूटर के प्रमुख भाषा हैं। आज कल सबसे अधिक डिजिटल कंप्यूटर के ही ज्यादा चलन एवं उपयोग हैं। डिजिटल कंप्यूटर के उपयोग ऑफिस, कॉलेज, स्कूल, दुकान, रेलवे, बैंक इत्यादि जैसे स्थानों या कार्य क्षेत्रों में इनके इस्तेमाल प्रमुख हैं। डेस्कटॉप, लैपटॉप, मोबाइल, डिजिटल घड़ी जैसे Digital computer’s के उदहारण हैं।

3. हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid computer) – ऊपर बताए दोनों प्रकार के एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटर की दोनों विशेषताएं हाइब्रिड कंप्यूटर में होती है। Hybrid computer अंको की गणना में इतने अधिक फास्ट है एवं आपको बता दें की ये मापन में भी सक्षम हैं। उदाहरण के तहत 1) जब आप कही अस्पताल में जाए तो वहां पर लगा हुआ कंप्यूटर हाइब्रिड कंप्यूटर होता है, जिसके द्वारा किसी भी पेसेंट के तापमान, ब्लड प्रेशर, धड़कन इत्यादि को मापा जा सकता है, और अंकों के स्वरूप में दर्शाते हैं। 2) पेट्रोल पंप में लगी हुई डिवाइस या मशीन भी हाइब्रिड कंप्यूटर होती है, जो पेट्रोल की मात्रा मापने के अलावा मूल्य भाव को भी गणना करके अंकों में दर्शाती हैं।

कंप्यूटर का आविष्कार Computer ka Abishkar

एक ब्रिटिश गणितज्ञ द्वारा 19वी शताब्दी में आविष्कार किया वह वैज्ञानिक या अविष्कारक Charles Babbage था। आज की सभी में हम चार्ल्स बेबेज को कंप्यूटर का जनक (Father of Computer) भी कहा जाता है।

कंप्यूटर का फुल फॉर्म अंग्रेजी इंग्लिश में अर्थ –

कंप्यूटर की साइपलिंग में आने वाले सभी केरेक्टर के अभी को अलग अलग अनुसार नीचे बताए गए –

C–Commonly , O–Operated , M–Machine , P–Particularly , U–Used For , T–Technical , E–Educational , R–Research .

कंप्यूटर की विशेषताएँ Computer ki visheshta

कंप्यूटर की विशेषताए क्या है? आज कंप्यूटर अपनी विशेषताओं के कारण ही मानव के अभिन्न अंग में से एक बन चुका है। मानव की जीवन श्रंखला कंप्यूटर के बिना अधूरी सीन दिखाई पड़ती है कई क्षेत्रों में कंप्यूटर विशेष रूप से कार्य कर रहा है। चाहे वह चिकित्सा के क्षेत्र की बात की जाए, चाहे कृषि के क्षेत्र की बात की जाए या फिर किसी भी अस्पताल या कोई गणना क्षेत्र में कंप्यूटर के इस्तेमाल की बात की जाए। हर जगह कंप्यूटर अपनी विशेषताओं को लिए हुए समाहित है आज हम कंप्यूटर की ऐसी कई विशेषताओं को इस के नीचे देखने वाले हैं –

1. बीना गलती के कार्य (Accuracy)

जैसे कि नाम से ही सिद्ध है कि गलती रहित कार्य त्रुटि रहित वर्क की विशेषता दोस्तों कंप्यूटर अपनी तेज गति के इसी के कारण बिल्कुल सटीकता से एवं बिना किसी गलती के हमें हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों के परिणाम को बिल्कुल सही सही देता है। यह गुण इसका विशेष विशेषताओं में शामिल करता है। यदि मानव कोई गलती से गलत निर्देश दे ती वह गलत परिमाण दे सकता है लेकिन कंप्यूटर उसकी तरफ से किसी भी तरह के गलत रिजल्ट हमे नही देता हैं।

2. गति (Speed)

अपनी गति के लिए प्रचलित होकर आज के समय में यह सुपर कंप्यूटर के जमाने तक पहुंच चुका है। आज अपनी गति को कुछ ही सेकंड या और कहीं मिनी सेकंड में कई करोड़ों की गणना करने की क्षमता रखने वाला है। यह कंप्यूटर सबसे अधिक गतिशीलता से कार्य करने के लिए उत्सुक है। हम आपको बता दें की 1 सेकंड में करीब 1 मिलियन निर्देशों को प्रोसेस कर सकता है। यह सुनकर आप अपने आप में शामिल हैं।

3. विशाल भंडारण क्षमता (Large Storage Capacity) 

अपने अंदर के अंतरिक भंडार (internal स्टोरेज)के साथ इसमें बाहरी भंडारण (external storege) क्षमता भी विद्यमान हैं। एवं यह बड़े से बड़े डाटा को अपनी उच्च गति एवं परिशुद्धता से इकठ्ठा करें में सक्षम हैं।

4. पुनरावृति (Repetition)

मानव द्वारा दिए गए निर्देशों को बार-बार कार्य कर विश्वसनीय एवं त्रुटि रहित कार्यों को तीव्रता के साथ प्रस्तुत करने के लिए एवं पुनरावृति करने में बहुत अहम उद्देश्य है

5. लगन (Diligence)

मनुष्य की बात की जाए तो यह है एक बार अपने काम को करके थक सकता है, या फिर कुछ समय बाद अपने मानवीय गुणों के कारण थकावट महसूस कर सकता है, लेकिन कंप्यूटर के साथ ऐसी बात नहीं है। कंप्यूटर बिना किसी आलस्य के पूरी लगन के साथ अपने कार्य को करने में सक्षम है। एवं मनुष्यों की तुलना में कई लाखों गुना अधिक गणनाओं को करने एवं परिशुद्धता के साथ परिणामों को प्रस्तुत करने के लिए यह विशेष गुण रखता है।

6. स्वचालन (Automation)

कंप्यूटर के अंदर मौजूद स्वचालित गुण या ऑटोमेटिक सिस्टम के कारण यह मानव द्वारा एक बार दिए गए निर्देशों के अनुसार अपने कार्य को पुनरावृति कर पूरी लगन एवं मेहनत से शुद्ध परिणाम आपके लिए प्रस्तुत करता रहता है। और यह स्वचालन की क्रिया जब तक मानव ना चाहे वह संपन्न करते रहता है। यह गुण इसका विशेष गुण की श्रेणी में आता है।

7. विविधता (Versatility)

कंप्यूटर अपनी विविधता एवं विभिन्नता के गुण के कारण यह कई अलग-अलग कार्यों को एक साथ कर पाने में सक्षम है। रेलवे की बात करें तो उसमें कई अलग-अलग काम बैंक की बात करें, तो बैंक में अलग-अलग कार्य को एवं मौसम संबंधित कई घटनाओं के परिकलन के लिए यह अपने अलग अलग गुणों को अलग अलग कार्यों को एक साथ कुछ ही सेकंड में करने के लिए तैयार रहता है, यह इसका विशेष गुण है।

8. गोपनीयता (Secrecy)

यदि आपको बॉर्डर में किसी फाइल को तैयार करते हैं। और उसमें अपने द्वारा पासवर्ड लगा देते हैं, तो यह आपकी गोपनीयता को बनाए रखने में सक्षम रहता है। आपके द्वारा बनाए गए पासवर्ड के अलावा यह किसी अन्य से नहीं ओपन हो सकता यह पूरी तरह से आप की गोपनीयता को बनाए रखने में बहुत अच्छे से सक्षम है। एवं यह अपनी गतिशीलता एवं अपने ऑटोमेटिक गुण के कारण स्वचालित रूप से कई क्रियाओं को करते रहता है। और मनुष्य को ज्यादा से ज्यादा सही परिणाम प्रदान करता है।

9. स्थायी भंडारण क्षमता (Permanent Storage Capacity)

कंप्यूटर के अंदर स्थाई भंडारण क्षमता होती है यह क्षमता कंप्यूटर के अंदर मौजूद किसी भी डाटा को यदि आपने उसके अंदर समाहित किया हुआ है तो उसे भूलने नहीं देती आप किसी भी समय उस डाटा को प्राप्त कर सकते हैं एवं उस स्टोरेज को आप कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं उसे पुनः प्राप्त करने के लिए आपको भंडारण क्षमता में जाकर अपने डाट को सिद्ध करना आवश्यक है।

 

समापन शब्द: दोस्तों आज आपने इस पेज पर कंप्यूटर के बारे में बहुत सारी जानकारियां देखी उस में मुख्य रूप से बताया गया था कि कंप्यूटर क्या है। कंप्यूटर की फुल फॉर्म कंप्यूटर की विशेषताएं इसके अलावा भी आपने बहुत सारी चीजें इस पेज पर देखी, यदि आप हमारे द्वारा हमारे पेज पर दी गई जानकारी से संतुष्टि रखते हैं, तो कृपया कमेंट करके हमें बताएं।

एवं यदि आप चाहते हैं, कि किसी अन्य नॉलेज को इस पेज पर जोड़ा जाए तो उसे भी आप चाहे, तो हम तक पहुंचा सकते हैं आप किसी भी संदेह है। या बातचीत के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं। एवं हमारी वेबसाइट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सर्च कर सकते हैं। चाहे वह किसी भी तरह का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक हो व्हाट्सएप हो या ट्विटर हो आप हमारी वेबसाइट का नाम खोजें वहां आपको हमारे वेबसाइट के पेज एवं ग्रुप से दिखाई देंगे, उन में आप हम तक पहुंच सकते हैं।